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मुंबई, गुरुवार को मुंबई के घाटकोपर में दुर्घटनाग्रस्त होने वाले चार्टेड विमान के पास आवश्यक उड़ान योग्यता सर्टिफिकेट नहीं था. इस 12 सीटर विमान ने आखिरी बार 2008 में उड़ान भरी थी, जिसके बाद इसे पहली बार टेस्ट उड़ान के लिए गुरुवार को बाहर निकाला गया था.

गुरुवार शाम को नागरिक उड्डयन मंत्रालय की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया, 'एयरक्राफ्ट ने आखिरी बार 22 फरवरी 2008 को उड़ान भरी थी, तब यह उत्तर प्रदेश सरकार के पास था. 2014 में एयरक्राफ्ट को एम/एस यूवाई एविएशन ने खरीद लिया.'

बयान में आगे कहा गया कि पिछले डेढ़ साल से एयरक्राफ्ट के मेंटनेंस का काम चल रहा था. डीजीसीए के पास उड़ान योग्यता के सर्टिफिकेट के लिए आवेदन करने से पहले, मेंटनेंस का काम पूरा होने के बाद एयरक्राफ्ट की यह पहली टेस्ट उड़ान थी.

गुरुवार को 1 बजे ‘किंग एयर सी 09 विमान’ घाटकोपर टेलीफोन एक्सचेंज के पास ओल्ड मलिक एस्टेट में एक निर्माणाधीन इमारत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया. अगर विमान किसी अन्य इमारत के पास गिरता तो आवासीय क्षेत्र में हुई इस दुर्घटना में और अधिक नुकसान हो सकता था.

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार लोगों की जान बचाने के लिए कैप्टन मारिया जुबेरी और प्रदीप राजपूत, विमान को अपेक्षाकृत खाली स्थान पर लेकर गए. बाद में कैप्टन मारिया के पति पी कुथरिया ने कहा, ‘हादसे को रोका जा सकता था. मारिया ने मुझे बताया था कि खराब मौसम के कारण विमान को नहीं उड़ाया जाना चाहिए. इस दुर्घटना के लिए विमानन कंपनी जिम्मेदार है.’

जूहू एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) के एक सूत्र ने कहा कि टेस्ट फ्लाइट के लिए विमान ने जूहू हवाई पट्टी से उड़ान भरी थी. जब यह जूहू से चार समुद्री मील की दूरी पर था, तब नियंत्रण खोने की वजह से हादसे का शिकार हो गया.

सरकार की ओर से एक बयान में कहा गया, 'नियामक प्रावधानों के अनुसार, किसी भी टेस्ट उड़ान से पहले, विमान उड़ाने के लिए योग्य है अथवा नहीं इसका सर्टिफिकेट आवश्यक होता है, जो कि अधिकृत प्रमाणिक स्टाफ अथवा एमआरओ द्वारा जारी किया जाता है.'

यह पता चला है कि जब विमान को टेस्ट उड़ान के लिए बाहर निकाला गया था तब उसे यह अनिवार्य सर्टिफिकेट नहीं दिया गया था. नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) को विमान हादसे की जांच करने को कहा था.

दो पायलटों के अलावा इंजीनियर सुरभि बृजेश कुमार गुप्ता, तकनीशियन तेजपाल पांडे और गोविंद पंडित की इस हादसे में मौत हुई है.

डीजीसीए अधिकारियों को विमान का वायस डाटा रिकार्डर मिल गया है जिससे उन्हें हादसे से जुड़ी घटनाओं की कड़ियां जोड़ने में मदद मिलेगी.

महाराष्ट्र में दो दिन में यह दूसरा हवाई हादसा है. नासिक के पास गुरुवार को हिन्दुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड का एक सुखोई सु-30 एम विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था जिसमें इसके पायलट और उड़ान परीक्षण इंजीनियर सुरक्षित बाहर निकाल आए थे.

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