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अमेरिका के जंगलों में लगी आग, हजारों एकड़ जमीन पर बने घर जलकर खाक

वॉशिंगटन: अमेरिका के कैलिफोर्निया, कोलोराडो और न्यू मेक्सिको के जंगलों में लगी भीषण आग से हजारों एकड़ जमीन पर बने घर जलकर खाक हो गए. आग के कारण हजारों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है. ऑरेंज काउंटी दमकल प्रशासन के अनुसार, लॉस एंजेलिस के लगभग 50 मील दक्षिण में कैलिफोर्निया के लागुना बीच के इलाके की वनस्पतियों में लगी आग से लगभग 250 एकड़ जमीन बर्बाद हो गई. 400 से अधिक अग्निशामक आग पर नियंत्रण बनाने की कोशिश कर रहे हैं.  'सीएनएन' की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार रात तक आग पर काबू नहीं पाया जा सका है.

एलिसो फायर के रूप में नामित आग से अब तक किसी के हताहत होने या भवनों के नुकसान की खबर नहीं मिली है, लेकिन लगुना बीच के आसपास से निकासी प्रक्रिया जारी है. शनिवार तक लगभग 2,000 निवासियों को यहां से निकाला जा चुका है. 

अमेरिकी वन विभाग के प्रवक्ता जिम मैकेंसन ने 'सीएनएन' को शनिवार को बताया, कोलाराडो ला प्लाटा काउंटी में आग को 416 फायर का नाम दिया गया है. इससे अभी तक 1,100 एकड़ की जमीन जलकर खाक हो गई है. वहीं, शनिवार सुबह तक घास और लकड़ियों की वजह से आग का फैलना जारी है. 

क्यों पहाड़ों पर लगती है आग ? 
पहाड़ी इलाकों में हर साल गर्मी के मौसम में आग लगने की घटनाओं का बढ़ना पर्यावरण के लिये चिंता का विषय बन गया है. इस साल तीन राज्यों जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के जंगलात में लगी आग की समस्या गंभीर हो गई है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक अकेले उत्तराखंड में फरवरी से अब तक आग लगने की लगभग 700 छोटी बड़ी घटनायें दर्ज की जा चुकी हैं. आग लगने की घटनाओं और इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर उत्तराखंड के प्रमुख वन संरक्षक डा. एसडी सिंह से भाषा के पांच सवाल. 

गर्मियों में पहाड़ों पर आग लगने की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी की क्या वजह है? 
उत्तर- ऐसा नहीं है कि पहाड़ों पर जंगलों में आग की घटनायें हर साल बढ़ रही हैं.  दरअसल आग लगने की घटनाओं के पीछे पर्वतीय इलाकों में बारिश न होने की अवधि (ड्राइ स्पैल) में इजाफा होना मुख्य वजह है.  गर्मी के मौसम में औसतन 20 से 25 दिन के अंतराल पर अगर बारिश नहीं होती है तो जंगलों में पेड़ से गिरने वाले पत्ते और घास के सूखने से आग लगने का खतरा ज्यादा हो जाता है.  इसलिये गर्मी में ‘ड्राई स्पैल’ के बढ़ने पर आग लगने की घटनायें बढ़ जाती है.  साल 2013-14 में ड्राई स्पैल ज्यादा रहा लेकिन इसके बाद यह साल दर साल दुरुस्त होता गया.  यह जरूर है कि जिन इलाकों में अभी आग लगने की घटनायें हुयी हैं उनमें ‘ड्राई स्पैल’ देखा गया है.  

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