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सहारनपुर: हत्या या एक्सीडेंटल डेथ? खून के धब्बे धोने का VIDEO आया सामने

सहारनपुर, सहारनपुर में भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष कमल वालिया के भाई सचिन वालिया की मौत की गुत्थी उलझ गई है. जहां पुलिस इसे संदिग्ध मान कर तफ्तीश में जुटी है, वहीं परिजनों का मानना है कि उसकी हत्या की गई है. इस बीच एक वीडियो सामने आया. जिसे लेकर पुलिस का दावा है कि यह मौके वारदात की है. वीडियो में सचिन वालिया के घर वाले सड़क पर पड़े खून के धब्बे को धोते नजर आ रहे हैं.

एसएसपी बबलू कुमार के मुताबिक वीडियो को लोकल इंटेलिजेंस यूनिट के कर्मचारी ने मोबाइल से शूट किया है. एलआईयू पुलिस कर्मी के मुताबिक जब मौका-ए-वारदात पर उसने तफ्तीश की तो उन्हें बताया गया कि कोई छत से गिर गया था. जिसके खून के धब्बे हैं. अब साफ किया जा रहा है.

मामले में एसएसपी का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला संदिग्ध लग रहा है. मौके का मुआयना किया गया है. छानबीन जारी है. जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा. उनका कहना था कि परिवार वाले भी सदमे में हैं. वह भी यह नहीं बता पा रहे हैं कि घटना कहां हुई.

इससे पहले जिला अस्पताल में परिजनों ने सचिन की मौत पर जमकर हंगामा किया. उनका आरोप था कि हत्या प्रशासन की वजह से हुई है. महाराणा प्रताप की जयंती को लेकर भीम आर्मी की तरफ से चेतावनी दी गई थी. बावजूद इसके जिला प्रशासन ने जयंती के लिए अनुमति दी.  अस्पताल के बाहर भी उस समय माहौल ख़राब हो गया जब परिजनों ने शव के पोस्टमार्टम का विरोध किया. जिसके बाद पुलिस को हल्का बल भी प्रयोग करना पड़ा.
आपको बता दें कि पिछले साल आज ही के दिन इसी रामनगर गांव में दलितों ने हिंसक प्रदर्शन किया था. पुलिस पर पथराव, फायरिंग की गई थी. अधिकारियों को पीटा गया था. दर्जनों वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया था. दरअसल दलितों पर अत्याचार के खिलाफ तब पंचायत कर रहे भीम आर्मी और दलित संगठनों से जुड़े लोगों को पुलिस ने खदेड़ दिया था. जिसके बाद ये लोग रामनगर गांव में इकट्ठा हुए थे और फिर भीड़ हिंसा पर उतारू हो गई थी. हालांकि बाद में भीम आर्मी के मुखिया चन्द्रशेखर रावण को हिंसा का मास्टरमाइंड मानते हुए गिरफ्तार कर लिया गया था. रावण आज भी रासुका के तहत जेल में बंद है.

आज हुई घटना ने प्रशासनिक लापरवाही को भी उजागर किया है. दरअसल रामनगर गांव दलित बहुल है और यहां पर राजपूत समाज द्वारा महाराणा प्रताप भवन बनवाया गया है. राजपूत समाज द्वारा पिछले कुछ दिनों से यहां नौ मई को महाराणा प्रताप जयन्ती कार्यक्रम की तैयारियां की जा रही थी. ज़िला प्रशासन ने पहले किसी भी कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी थी लेकिन कल एक नाटकीय घटनाक्रम में डीएम ने सिर्फ 150 लोगों को कार्यक्रम करने की अनुमति दी थी. घटना के बाद अब पुलिस अधिकारी लीपा पोती में जुट गई है. एसएसपी बबलू कुमार का कहना है कि कार्यक्रम स्थल पर भारी पुलिस बल मौजूद था. ऐसे में इस तरह की घटना का वहां पर होना संभव नहीं है.

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