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कर्नाटक में कांग्रेस के इस उम्मीदवार ने क्राउड फंडिंग के सहारे लड़ा चुनाव

नई दिल्ली, किसी भी चुनाव में राजनीतिक पार्टियां पानी की तरह पैसा बहाती हैं. बड़ी-बड़ी रैलियों से लेकर रोड शो हर जगह पैसों की चमक नजर आती है, लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि कोई नेता क्राउड फंडिंग के सहारे अपनी चुनावी नैया पार कराने की में जुटा हो. क्राउड फंडिंग यानी किसी उम्मीदवार को चुनाव लड़ाने के लिए लोगों की तरफ से पैसे इकठ्ठा करना.

मिलिए 33 साल के योगेश बाबू से जो मोलकालमुरु विधान सभा क्षेत्र से चुनाव लड़े. योगेश बाबू का मुकाबला यहां खनन माफिया जनार्दन रेड्डी के करीबी श्रीरामुलु से है.

चुनाव में पारदर्शिता लाने के लिए पहली बार ऐसा प्रयोग किया जा रहा है. योगेश बाबू कहते हैं, "चुनावों के दौरान पैसे की ताकत सबसे ज्यादा मायने रखती है, खास तौर से अगर आप जनार्दन रेड्डी के करीबी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हो."

योगेश बाबू ने संस्कृत में पीएचडी की है. वो पहली बार चुनावी मैदान में उतरे हैं. लेकिन उन्होंने ज़मीनी स्तर पर काम किया है. इतना ही नहीं वो अपनी 'साफ छवि' के लिए भी जाने जाते हैं. योगेश बाबू अपने इलाके में खासे लोकप्रिय युवा हैं.

योगेश बाबू ने कहा, ''चुनाव प्रचार के लिए पिछले 2-3 दिन काफी अहम रहे हैं. मेरे विरोधी पैसों के बल पर मतदाताओं को अपनी ओर मोड़ रहे हैं. इसलिए इस मंच के माध्यम से मुझे जो पैसा मिलेगा, वो क्षेत्र के लोगों के लिए अच्छे कामों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा."

पार्टी ने क्राउड फंडिंग के जरिए लिए 28 लाख रुपये का लक्ष्य रखा है. इतना ही पैसा चुनाव आयोग प्रचार के लिए खर्च करने की अमुमति देता है. खबर लिखे जाने तक योगेश बाबू को 184 लोगों से अब तक 4,19,340 रुपये मिले थे. जबकि प्रचार खत्म होने में अभी दो दिन का वक्त बाक़ी है. कर्नाटक में 12 मई को चुनाव होने हैं और नतीजे 15 मई को आएंगे.

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