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तीसरी बार CM बने येदियुरप्‍पा, सत्ता में कभी पूरे नहीं कर पाए 5 साल, इस बार भी सस्पेंस बरकरार

नई दिल्‍ली: कर्नाटक में सियासी रार अपने पूरे चरम पर है. जहां एक तरफ कांग्रेस और जेडीएस ने कर्नाटक में बीजेपी की सरकार बनाए जाने के दावे के विरोध में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया तो वहीं सुप्रीम कोर्ट भी पूरी रात इस सवाल पर बहस सुनती रही. कोर्ट ने असाधारण रूप से रात भर सुनवाई कर येदियुरप्‍पा के शपथ ग्रहण पर रोक नहीं लगाई और सुबह होते ही तय समयानुसार बीएस येदियुरप्‍पा ने फटाफट कर्नाटक के नए सीएम पद की शपथ ले ली. यह तीसरी बार है, जब बीएस येदियुरप्‍पा ने कर्नाटक की गद्दी पर अपना कब्‍जा किया है, लेकिन उनका सीएम के रूप में अपने 5 साल का कार्यकाल पूरा करने का सपना कभी पूरा नहीं हुआ है.

8 दिन ही नसीब हुई थी गद्दी
येदियुरप्‍पा कर्नाटक राज्‍य की शिकारीपुर विधानसभा से चुनाव लड़ते और जीतते आ रहे हैं. सबसे पहले बीएस येदियुरप्‍पा ने साल 2007 में मुख्‍यमंत्री पद की शपथ ली थी. लेकिन उस समय वह महज 7 दिन के लिए ही सीएम पद पर रह सके थे. लिंगायत समाज से आने वाले येदियुरप्पा का जन्म 27 फरवरी 1943 को मांड्या जिले के बुक्कनकेरे में हुआ था. येदियुरप्‍पा चुनाव-दर-चुनाव कर्नाटक की जनता में अपनी पैंठ बनाते रहे और कर्नाटक की राजनीति के पटल पर चमकते रहे. साल 2007 में कर्नाटक में राजनीतिक उलटफेर का दौर हुआ. येदियुरप्‍पा के ही प्रयासों से कांग्रेस की सरकार गिरा दी गई और सत्ता में जेडीएस-बीजेपी गठबंधन आ गया. जेडीएस-बीजेपी के इस गठबंधन में हुए समझौते के तहत पहले कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनाया गया, लेकिन जब उनके हटने और येदियुरप्पा के मुख्‍यमंत्री बनने का मौका आया तो, स्थितियां पलट गईं और वह महज 7 दिन ही सीएम पद पर रह सके. 12 नवंबर 2007 को शपथ लेने वाले येदियुरप्‍पा को 19 नवंबर को ही इस्‍तीफा देना पड़ा. जिसके बाद कर्नाटक में राष्‍ट्रपति शासन लागू किया गया.

फिर देना पड़ा इस्‍तीफा, हुई जेल
कर्नाटक में हुए इस पूरे सियासी खेल के बाद साल 2008 में फिर विधानसभा चुनाव हुए और बीजेपी ने जबरदस्त जीत हासिल कर सरकार बनाई. इस बार भी येदियुरप्पा ही बीजेपी का चेहरा और मुख्‍यमंत्री पद के उम्‍मीदवार बने. 2008 में फिर येदियुरप्‍पा कर्नाटक के सीएम बन गए, लेकिन इस बार भी सत्ता का सुख उनके नसीब में नहीं था. इस बार वह तीन साल और 2 महीने के लिए ही मुख्‍यमंत्री रह पाए और फिर इस्‍तीफा देकर जेल जाना पड़ा. कर्नाटक में विवादों में आए जमीन घोटाले से लेकर खनन घोटाले तक में उनका नाम शामिल हुए. भ्रष्‍टाचार के आरोप में येदियुरप्‍पा को 20 दिन के लिए जेल भी जाना पड़ा.

भाजपा से भी टूटा था नाता
जेल जाने के बाद येदियुरप्‍पा ने बीजेपी से अपनी राहें अलग कर ली थीं और अपनी खुद की पार्टी 'कर्नाटक जनता पक्ष' बनाई. लेकिन 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले येदियुरप्‍पा की एक बार फिर बीजेपी में वापसी हुई. अब यह तीसरा मौका है जब बीएस येदियुरप्‍पा ने मुख्‍यमंत्री पद पर अपना कब्‍जा जमाया है, लेकिन अभी भी सदन में बहुमत साबित करना बाकी है. क्‍या इस बार येदियुरप्‍पा मुख्‍यमंत्री के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा कर पाएंगे...?

क्‍या जुटेगा बहुमत का जादुई आंकड़ा?
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने बीएस येदियुरप्‍पा के शपथ लेने पर तो कोई रोक नहीं लगाई लेकिन अभी भी उनकी राह इतनी आसान नहीं है. 18 मई को सुबह 10:30 बजे बहुमत के जादुई आंकड़े की राजभवन में बीजेपी की तरफ से पेश की गई चिट्ठी अब सुप्रीम कोर्ट में पेश की जानी है, जिसके दम पर बीजेपी ने सरकार बनाने का दावा किया था. लिहाजा अब पूरा दारोमदार बीजेपी की तरफ से 15-16 मई को राज्‍यपाल को बीजेपी की तरफ से पेश की गई समर्थन की उस चिट्ठी पर टिक गया है. इसी से बड़ा सवाल उठता है कि क्‍या बीजेपी के पास बहुमत के लिए जरूरी 112 विधायकों का समर्थन है? ये सवाल इस वक्‍त इसलिए बेहद अहम हो गया है क्‍योंकि कांग्रेस(78 विधायक) और जेडीएस(38) ने 117 विधायकों के समर्थन की चिट्ठी राज्‍यपाल को 16 मई को पेश की है. इसमें एक निर्दलीय विधायक का भी समर्थन है.

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