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आरुषि हत्याकांड के 10 साल, 10 अहम किरदार

16 मई 2018 को बेहद चर्चित रहे आरुषि और हेमराज हत्याकांड के दस साल पूरे हो रहे हैं. सवालों और रहस्यों की भेंट चढ़ चुके इस पूरे मामले में जिन दस किरदारों की खासी भूमिका रही, तस्वीरों में देखिए उनका रोल.

आरुषि तलवार : 16 मई 2008 को आरुषि की लाश उसके घर में देखी गई. आरुषि 14 साल की होने वाली थी और दिल्ली पब्लिक स्कूल की छात्रा थी. उसके स्कूल के लोगों ने बताया था कि वह मेधावी छात्रा थी जिसने लगातार 3 सालों तक 85 प्रतिशत से ज़्यादा स्कोर हासिल किया था. उसके स्कूली दोस्तों का कहना था कि वह खुशमिज़ाज और दूसरों की मदद करने वाली लड़की थी.

हेमराज बेंजाडे : आरुषि के घर में रहने वाला नौकर था हेमराज. आरुषि की हत्या के सिलसिले में पहला शक हेमराज पर ही था लेकिन दो दिन बाद हेमराज का शव मिलने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया. 40 साल का हेमराज मूलत: नेपाली था.

राजेश तलवार : पेशे से डेंटिस्ट और सर्जन आरुषि के पिता डॉ. राजेश तलवार को इस केस की शुरुआती जांच के दौरान आरुषि का हत्या का ज़िम्मेदार माना गया. आरुषि की हत्या के करीब दस दिन बाद ही पहली बार डॉ राजेश को गिरफ्तार किया गया था. सीबीआई कोर्ट ने 2013 में राजेश तलवार को उम्र कैद की सज़ा सुनाई.

नूपुर तलवार : आरुषि की मां और राजेश तलवार की पत्नी नूपुर पर भी बेटी की हत्या में शामिल होने के आरोप लगे. 2012 में नूपुर ने सरेंडर किया जिसके बाद उन्हें जेल भेजा गया. 2013 में सीबीआई कोर्ट द्वारा राजेश के साथ नूपुर को सज़ा सुनाई. नूपुर और राजेश को 2017 में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा ठोस सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया.

अरुण कुमार : 1985 बैच के आईपीएस अफसर अरुण कुमार ने सीबीआई के बतौर जॉइंट डायरेक्टर करीब सौ दिनों तक इस डबल मर्डर की जांच की थी. बाद में उन्होंने बयान दिया था कि उन्हें लगता है कि इस केस में तलवार दंपति बेकसूर हैं और उन पर जो इल्ज़ाम लगे उनका कारण जांच में कई तरह के लूपहोल्स माना जा सकता है.

विजय शंकर तिवारी : आरुषि केस की शुरुआती सीबीआई जांच के समय तिवारी सीबीआई डायरेक्टर थे जो कुछ ही समय बाद रिटायर हो गए. 2017 में तिवारी की ओर से बयान आए कि उनकी व्यक्तिगत राय में इस केस में इंसाफ नहीं हुआ, हालांकि उन्होंने इसे कोर्ट के फैसले से न जोड़ने की बात की. तिवारी ने भारत में जांच के सिस्टम को लेकर भी खेद जताया और कहा कि जांच के स्टैंडर्ड हमारे देश में दुखद रहे हैं.

भारती मंडल : तलवार दंपति के घर में कामकाज के लिए आने वाली भारती इस केस में प्रमुख गवाह रही. घटना के दिन सुबह डोरबेल बजाकर भारती ने ही घर का दरवाज़ा खुलवाया था जिसके बाद आरुषि की हत्या होने का खुलासा हुआ और नूपुर पहली व्यक्ति थीं जिन्होंने आरुषि का शव देखा और भारती इस बात की गवाह रहीं.

खुमकला बेंजाडे : हेमराज की पत्नी खुमकला शुरू से ही इस केस में तलवार दंपति के खिलाफ आरोप लगाती रहीं और उन्हें अपने पति के हत्यारा मानती रहीं. 2017 में हाई कोर्ट से तलवार दंपति को बरी किये जाने के बाद खुमकला ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया और हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देती हुई याचिका दायर की.

जांच एजेंसियां : नोएडा डबल मर्डर केस में स्थानीय पुलिस से लेकर सीबीआई की टीमों द्वारा की गई जांच हमेशा सवाल पैदा करती रही. सीबीआई एजेंसी ने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस ने ज़िम्मेदारी से सबूत नहीं जुटाए वहीं सीबीआई की अलग—अलग टीमों की जांच ने कई बिंदुओं पर विरोधाभासी नतीजे प्रस्तुत किये जिससे पूरा मामला उलझकर रह गया.

बीजी चिटनीस : इंडियन एयरफोर्स में ग्रुप कैप्टन रहे चिटनीस नूपुर के पिता और आरुषि के नाना हैं जिन्होंने लंबे समय बाद मीडिया में अपना बयान दिया. उन्होंने एक खुला खत लिखते हुए अपनी बेटी और दामाद पर लगे आरोपों को दुखद बताया. चिटनीस ने कहा कि इस अनुभव के बाद हर संस्था से उनका विश्वास उठ गया है. अपनी उम्र का हवाला देते हुए कहा कि इस उम्र में बेटी को जेल जाते देखना असहनीय होता है. चिटनीस ने अपने पत्र में यूपी पुलिस, सीबीआई और न्यायिक व्यवस्था को बिना सबूतों के राजेश व नूपुर को जेल में रखने का दोषी करार दिया.

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