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SCO देशों से टूरिज्म को आसानी से दोगुना किया जा सकता है: PM मोदी

चिंगदाओ: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन देशों के बीच पर्यटन बढ़ाने की जरूरत पर जोर देते हुए आज कहा कि भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों में केवल छह फीसदी पर्यटक एससीओ देशों से आते हैं और इस संख्या को आसानी से दोगुना किया जा सकता है. मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि साझा संस्कृतियों के बारे में जागरुकता फैलाने से पर्यटकों की संख्या में इजाफा करने में सहायता मिल सकती है. उन्होंने कहा कि भारत में आने वाले विदेशी पर्यटकों में एससीओ देशों से केवल छह फीसदी पर्यटक आते हैं और जिसे आसानी से दोगुना किया जा सकता है.

मोदी ने कहा, ‘‘हमारी साझा संस्कृतियों के बारे में जागरुकता फैलाने से इस संख्या को बढ़ाने में मदद मिल सकती है. हम भारत में एससीओ फूड फेस्टिवल और बौद्ध पर्व मनाएंगे.’’ मोदी ने कहा कि शिखर सम्मेलन के सफल नतीजे निकले इसके लिए भारत पूरा सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है.

भारत और पाकिस्तान के इस संगठन का पूर्ण सदस्य बनने के बाद यह पहला मौका है जब भारतीय प्रधानमंत्री इस शिखर सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे हैं. इस संगठन में चीन और रूस का दबदबा है. इस संगठन को नाटो के समकक्ष माना जा रहा है. एससीओ में अभी आठ सदस्य देश हैं जो दुनिया की करीब 42% आबादी और वैश्विक जीडीपी के 20% का प्रतिनिधित्व करता है.

पीएम मोदी के अलावा इस शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन भी शामिल हुए हैं. वर्ष 2001 में स्थापित इस संगठन के भारत के अलावा रूस, चीन, किर्गीज गणराज्य, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और पाकिस्तान सदस्य हैं.

वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (10 जून) को पड़ोसी देशों और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के तहत आने वाले क्षेत्रों के बीच बेहतर संपर्क (कनेक्टिविटी) होने को भारत की प्राथमिकता बताया. उन्होंने इस शिखर सम्मेलन के नतीजों पर पूर्ण सहयोग देने की भारत की प्रतिबद्धता को भी जाहिर किया.

एससीओ शिखर सम्मेलन के सीमित सत्र के दौरान मोदी ने ‘सिक्योर’ की अवधारणा को भी रखा. इसमें ‘एस’ से आशय नागरिकों के लिए सुरक्षा, ‘ई’ से आर्थिक विकास, ‘सी’ से क्षेत्र में संपर्क (कनेक्टिविटी), ‘यू’ से एकता, ‘आर’ से संप्रभुता और अखंडता का सम्मान और ‘ई’ से पर्यावरण सुरक्षा है. मोदी ने कहा, ‘‘हम एक बार फिर उस पड़ाव पर पहुंच गए है जहां भौतिक और डिजिटल संपर्क भूगोल की परिभाषा बदल रहा है. इसलिए हमारे पड़ोसियों और एससीओ क्षेत्र में संपर्क हमारी प्राथमिकता है.’’

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