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भोपाल, मध्य प्रदेश के मंदसौर में पुलिस फायरिंग में मारे गये छह किसानों के परिवार किसान पुत्र मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से इंसाफ़ मांग रहे हैं. एक साल बाद भी ये नहीं पता कि किसानों पर गोली किसने चलाई. न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट का हर किसान को इंतज़ार है. एक से दस जून तक किसान फिर आंदोलन पर हैं और 6 जून को राहुल गांधी मृत किसानों को श्रद्धांजलि देने मंदसौर आ रहे हैं.

मंदसौर में ठीक एक साल पहले किसान आंदोलन में पुलिस फ़ायरिंग में महज 22 साल के अभिषेक पाटीदार की मौत हो गई थी. अभिषेक की शादी भी नहीं हुई थी. परिवार को शिवराज सरकार ने एक करोड़ रुपये की मदद की है. लेकिन फिऱ भी अभिषेक की मौत इस परिवार के लिये ज़िन्दगी भर का सदमा है.

फायरिंग में मारे गए अभिषेक की मां कहती हैं,

इंसाफ़ नहीं मिला. मेरा बेटा पुलिस की गोली से मरा है. जैन आयोग के बावजूद भी बेटे के हत्यारे को पकड़ा नहीं गया. ना कोई सज़ा दी. सीएम सर ने जो घोषणा की थी वो पूरी हो गई. उससे हमें कोई लेना देना नहीं है. नौकरी और पैसे से कुछ नहीं होता जब तक की उस हत्यारे को पकड़ा नहीं जाये. तब तक मेरे बेटे औऱ छह किसानों की आत्मा को शांति नहीं मिलेगी.

ऐसे ही कुछ हाल हैं मृत किसान कन्हैया लाल के परिवार के. सरकार ने एक करोड़ रुपये दे दिये औऱ सरकारी नौकरी भी मंज़ूर हो गई. लेकिन पैसे औऱ इंसाफ़ का आपस में कोई रिश्ता नहीं. पत्नी हो या भाई सभी एक सुर में चाहते हैं कि गोली चलाने वाले पर 302 का मुकदमा हो लेकिन अभी तो ये भी नहीं पता कि गोली किसने चलाई. इंसाफ़ का तराज़ू एक करोड़ से झुका नहीं है. किसान के परिवार को इसांफ इंसाफ इंसाफ़ चाहिये. कन्हैयालाल की पत्नी सुमित्रा बाई कहती हैं,

मुख्यमंत्री जी ने एक करोड़ रुपये दिये तो क्या वो भी कोई सम्मान नहीं. वो एक करोड़ रुपये नहीं चाहिये थे हमें. वो करोड़ रुपये देंगे तो क्या वो हमारे आदमी (पति) को वापस ला सकते हैं. अभी तक उन दोषियों का कुछ पता नहीं चला. बोले कि उनका पता करेंगे. साल भर हो गये उनका कुछ पता नहीं है. मुख्यमंत्री से फिर बात करना चाहिए.

मंदसौर पुलिस फ़ायरिंग के जख्म अभी हरे हैं.
अभिषेक पाटीदार (22)
कन्हैयालाल पाटीदार (40)
चैनराम पाटीदार (40)
पूनमचंद उर्फ बब्लू पाटीदार (32)
सत्यनारायण धनगर (40)
घनश्याम धाकड़ (28)

इन परिवारों को इंसाफ की किरण एक साल पहले दिखाई थी. 12 जून 2017 को शिवराज सरकार ने एक सदस्यीय जैन आयोग का गठन कर तीन महीने के अंदर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था.

न्यायिक आयोग को पता करना था कि पुलिस फ़ायरिंग सही थी या नहीं. यदि नहीं तो फिर फ़ायरिंग के लिए गुनहगार कौन है. इसके बाद जैन आयोग का कार्यकाल बढ़ता रहा. पीड़ित किसानों के परिवार ही नहीं. तारीख़ भी रिपोर्ट का इंतज़ार कर रही है.

मंदसौर गोलीकांड की जांच कर रहे जैन आयोग की एक साल बाद भी रिपोर्ट नही आने के सवाल पर सीएम शिवराज सिंह चौहान कहते है कि न्यायिक आयोग के माननीय न्यायाधीश जांच कर रहे हैं. अपनी रिपोर्ट जल्दी ही देंगे. लेकिन राष्ट्रीय किसान महासंघ के संयोजक कक्काजी तो सीधा आरोप लगाते हैं कि मुख्यमंत्री ने लीपापोती करने के मकसद से ही आयोग बनाया था.

जब भी कोई आयोग बनता है आयोग का मतलब ही होता है कि उस मामले की लीपापोती करना है. तो सरकार लीपापोती में मास्टर है. तीन महीने में सरकार ने कहा था कि रिपोर्ट देंगे अब ये भी नहीं पता कि रिपोर्ट बनी की नहीं बनी. समय बढा कि नहीं बढ़ा. सरकार के पास कोई जवाब नहीं. सरकार इसे टालेगी चुनाव होने तक.

शिवराज सरकार के कृषि राज्यमंत्री बालकृष्ण पाटीदार ही पुलिस फ़ायरिंग में मारे गये किसानों के परिवारों के ज़ख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं. मंत्री जी के लिए मंदसौर पुलिस फ़ायरिंग इंसान की तरफ से लाया गया भूकंप था.

जांच का विषय है और उसमें समय लगता है. जांच रिपोर्ट आने से कोई किसान के जीवित नहीं होगा. ये दुर्घटना थी. जैसे भूकंप आ गया. उसमें किसी को दोष देना ठीक नहीं है. उसकी गहराई से जांच कर रहे हैं कि कोई निर्दोष फंसे नहीं. किसने गोली चलाई. किन परिस्थितियों में चलाई. आयोग में समय लग रहा है. रिपोर्ट तो आना ही है.

बहरहाल चुनाव के साल में जांच आयोग की रिपोर्ट में देरी शिवराज सरकार की गले की हड्डी बन चुकी है. 6 जून को राहुल गांधी मंदसौर में मृत किसानों को श्रद्धांजलि देने से पहले शिवराज मंदसौर पहुँचे लेकिन गोली कांड औऱ जांच आयोग की रिपोर्ट का कोई ज़िक्र नहीं किया.

कांग्रेस को भरोसा है कि चुनाव के साल में जांच आयोग की रिपोर्ट नहीं आयेगी. बीजेपी सरकार की सफाई है कि न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट देने के लिए सरकार बाध्य नहीं कर सकती. कांग्रेस के आरोपों पर गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह कहते हैं,

आयोग सरकार बनाती है. आयोग कितने समय में रिपोर्ट देगा इसके लिए शासन आयोग को बाध्य नहीं कर सकता. आयोग को लगता है कि अभी औऱ सबूत शेष हैं तो आयोग लिखकर शासन को भेजता है कि अवधि बढ़ाई जाये तो शासन मानने के लिये बाध्य है. ये न्यायिक प्रक्रिया है इसमें हम दखल नहीं करते.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की यूएसपी यानी पहचान 'किसान पुत्र' की है. लेकिन किसान पुत्र के राज में पुलिस फ़ायरिंग में छह किसानों की मौत शिवराज सरकार पर एक बदनुमा दाग है. इसी दाग को मिटाने के लिये सरकार ने मृत किसानों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये की मदद की मगर एक साल बाद भी न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट नहीं आ पाई. दुनिया को ये पता नहीं चल पाया कि किसानों की मौत का गुनहगार कौन है.

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