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नई दिल्ली, कर्नाटक में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं. कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन और भाजपा दोनों ने सरकार बनाने के लिए कवायद शुरू कर दी है. संविधान के विशेषज्ञों के अनुसार, राज्यपाल का पहले किसी दल या गठबंधन को सरकार बनाने के लिए बुलाना महत्वपूर्ण नहीं है. महत्वपूर्ण यह है कि शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री विधानसभा में अपना बहुमत साबित कर पाता है या नहीं. यदि राज्यपाल की ओर से पहले बुलाया गया दल या गठबंधन विधानसभा में बहुमत साबित नहीं कर पाता है तो उसे त्यागपत्र देना पड़ता है.

ऐसी स्थिति में कर्नाटक के ही पूर्व मुख्यमंत्री एसआर बोम्मई बनाम केंद्र सरकार के मामले में कोर्ट ने कहा था कि बहुमत का फैसला राजभवन में नहीं बल्कि विधानसभा के पटल पर होगा. परंपरा है कि राज्यपाल सबसे बड़े दल को सरकार बनाने का न्योता देते हैं.

कर्नाटक में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस-जेडीएस की 'दोस्ती' पर भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा ने कहा है कि कर्नाटक में 100% बनेगी बीजेपी की सरकार बनेगी. उन्होंने इससे पहले कहा कि कांग्रेस को लोगों ने नकारा है और भाजपा को अपनाया है. जनता कांग्रेस मुक्त भारत की ओर बढ़ रही है. कांग्रेस को कर्नाटक की जनता ने नकार दिया फिर भी कांग्रेस ताकत बटोरना चाहती है. उधर चुनाव नतीजों के बाद मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने राज्यपाल वजुभाई वाला को अपना इस्तीफा सौंप दिया है.

इससे पहले येदियुरप्पा ने कर्नाटक की जनता को बहुमत देने के लिए आभार भी जताया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पिछली सीढ़ी से सत्ता हासिल करना चाहती है, कांग्रेस की इस कोशिश को जनता सहन नहीं करेगी. येदियुरप्पा ने कहा कि पार्टी के साथ चर्चा के बाद ही भविष्य की रणनीतियों पर वे कुछ कह पाएंगे.

राज्यपाल को विवेक से फैसला लेने का अधिकार
संविधान के जानकार बताते हैं कि चुनाव में किसी दल को स्‍पष्‍ट बहुमत न मिलने पर राज्‍यपाल को अपने विवेक से फैसला करने का अधिकार है. ऐसे में सबसे बड़े दल को बुलाना जरूरी नहीं समझा गया है. संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्‍यप कहते हैं, इन स्‍थितियों में संविधान में ऐसा कुछ नहीं है कि राज्‍यपाल सबसे बड़े दल को बुलाएगा. चुनाव में पार्टी को बहुमत न मिलने की सूरत में राज्‍यपाल ऐसे व्‍यक्‍ति को मुख्‍यमंत्री नियुक्‍त करेगा जो उसके हिसाब से सदन में बहुमत प्राप्‍त कर सके. इसका उसे विवेकाधिकार प्राप्‍त है.

राज्‍यपाल को विवेकाधिकार है, लेकिन उसे अच्‍छी तरह से समझना होता है कि बहुमत का समर्थन किसके पास है. इसके लिए वह समर्थन पत्र भी लेता है. राज्यपाल जिसे सरकार बनाने का निमंत्रण देता है, उसे विधानसभा में बहुमत साबित करना होता है. यदि राज्यपाल के द्वारा नियुक्त मुख्यमंत्री विधानसभा में बहुमत साबित नहीं कर पाता है तो इससे राज्यपाल की गरिमा कम होती है.



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