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लखनऊ, राजधानी लखनऊ में पूर्व मुख्यमंत्रियों के अलावा कई रसूखदारों का भी सरकारी बंगले पर कब्ज़ा है. इन रसूखदारों में कई सियासी दलों के दिग्गज शामिल हैं. जिन्होंने ट्रस्ट या संस्था के नाम पर सरकारी बंगलों पर कब्ज़ा जमाया हुआ है.

पूर्व मुख्यमंत्रियों से बंगला खाली कराने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कहा जा रहा है कि देर सबेर तिकड़म से बंगले हथियाने वालों को भी अब उन्हें खाली करना पड़ेगा. गौरतलब है कि नाममात्र किराए पर आवंटित इन बंगलों पर राज्य संपत्ति विभाग सालाना करोड़ों रुपये खर्च करता है.

दरअसल, जो लोग सरकारी बंगला आवंटित कराने के लिए अधिकृत नहीं हैं, उन्होंने किसी ट्रस्ट या संस्था के नाम से कब्जा जमाया हुआ है. अगस्त 2016 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले ट्रस्ट व सोसायटीज के नाम पर 300 से ज्यादा बंगले आवंटित थे. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अधिकतर को खाली करवा लिया गया. बावजूद इसके अभी भी कई बंगलों पर कब्जा बरकरार है.

इनमें पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह व हेमवती नंदन बहुगुणा के नाम पर बने ट्रस्ट के माध्यम से माल एवेन्यू जैसे पॉश इलाकों पर बंगले आवंटित हैं. इसके अलावा राज नारायण ट्रस्ट के नाम पर भी बंगला आवंटित है. पूर्व बीजेपी सांसद कुसम राय का बंगला महात्तम राय ट्रस्ट के नाम आवंटित है. इसके अलावा लोहिया ट्रस्ट और जनेश्वर मिश्रा ट्रस्ट के नाम से विक्रमादित्य मार्ग और बंदरिया बाग़ में बंगला आवंटित है.

बसपा सुप्रीम मायावती जिस 13ए माल एवेन्यू में रहती थीं उस बंगले में भी 4000 वर्गमीटर जमीन मन्यावर कांशीराम स्मारक विश्राम स्थल ट्रस्ट की जमीन भी शामिल है. इस जमीन को गन्ना आयुक्त कार्यालय से लिया गया था. जिसे बाद में मायवती के आवास में मिला दिया गया. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जब राज्य संपत्ति विभाग ने बंगला खाली करने का नोटिस भेजा तो रातों-रात मायावती ने इसके बाहर मन्यावर कांशीराम स्मारक विश्राम स्थल का बोर्ड लगाकर सियासी दांव खेल दिया. इसके अलावा कई ऐसे सियासी दिग्गज हैं जिन्होंने ट्रस्ट या संस्था के नाम से बंगले कब्जाए हुए हैं.

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